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व्यापार की शुरुआत: कंपनी के सपने को हकीकत में बदलें

व्यापार की शुरुआत: कंपनी के सपने को हकीकत में बदलें

सपनों को व्यापार में बदलने का समय आ गया है, क्योंकि हर महान यात्रा की शुरुआत एक सपने से होती है

1. Introduction: नई कंपनी का आगाज

दोस्तों, भारतीय कंपनी अधिनियम 2013 के अनुसार, जब कोई नई कंपनी बनती है, तो वो उसके सफर की शुरुआत का बस एक छोटा सा कदम होता है। असली खेल तब शुरू होता है जब कंपनी अपने 'व्यावसायिक प्रारंभ' यानी 'Commencement of Business' की प्रक्रिया से गुजरती है। ये प्रक्रिया उस मोड़ पर ले जाती है जहां कंपनी को अपने बोर्ड की औपचारिक स्वीकृति और सरकारी मान्यता प्राप्त करनी होती है ताकि वो धंधा शुरू कर सके।

 

2. Commencement of Business का महत्व

इस प्रक्रिया का मतलब सिर्फ इतना नहीं होता कि कंपनी को सरकार से हरी झंडी मिल गई है। इसके मायने ये भी हैं कि कंपनी के पास पर्याप्त पूंजी (capital) है और वो अपने व्यापारिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए तैयार है। कंपनी अधिनियम 2013 के तहत, ये अनिवार्य है कि निगमन के 180 दिनों के भीतर कंपनी को अपने व्यावसायिक प्रारंभ की सूचना रजिस्ट्रार को देनी होती है।

 

3. Business शुरू करने की तैयारी

अब सवाल ये है कि ये प्रक्रिया होती कैसे है? इसके लिए सबसे पहले कंपनी को ये सुनिश्चित करना होता है कि उसके पास पर्याप्त पूंजी है। इसके बाद, कंपनी एक विशेष फॉर्म में ये घोषणा करती है कि वो अपने व्यापारिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए तैयार है। ये फॉर्म सरकार को ये बताने का तरीका है कि कंपनी फाइनेंशियली तैयार है और सही तरीके से चल रही है।

 

4. फॉर्म 20-A: व्यावसायिक प्रारंभ का प्रमाण

कंपनी को MCA (Ministry of Corporate Affairs) से 'बिजनेस शुरू करने का सर्टिफिकेट' प्राप्त करने के लिए फॉर्म 20-A फाइल करना होता है। इसे एक प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA), कंपनी सचिव (CS) या कॉस्ट अकाउंटेंट द्वारा सत्यापित किया जाता है। इस फॉर्म में निदेशकों को ये पुष्टि करनी होती है कि निवेशकों ने पैसा जमा कर दिया है और वो कंपनी के बैंक खाते में जमा हो चुका है।

 

5. फॉर्म 20-A भरने की प्रक्रिया

फॉर्म 20-A दाखिल करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण चीजें होती हैं:

  • फॉर्म 20-A को CA, CS या कॉस्ट अकाउंटेंट द्वारा सत्यापित किया जाता है।

  • फॉर्म के साथ पेड-अप शेयर कैपिटल का प्रमाण और कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस की पिक्चर्स भी संलग्न करना जरूरी होता है।

  • ये फॉर्म कंपनी के निगमन के 180 दिनों के भीतर दाखिल करना होता है।

 

6. फॉर्म 20-A न भरने के दंड

अगर किसी कंपनी ने फॉर्म 20-A नहीं भरा, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। कंपनी पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है, और दोषी पाए गए प्रत्येक अधिकारी पर प्रतिदिन 1,000 रुपये का दंड लगाया जा सकता है, जिसकी अधिकतम सीमा 1,00,000 रुपये तक हो सकती है। ये कड़े नियम इसलिए बनाए गए हैं ताकि फर्जी कंपनियों की संख्या कम की जा सके।

 

7. फॉर्म 20-A जमा करने में देरी के जुर्माने

देरी से फॉर्म जमा करने पर जुर्माना और भी बढ़ जाता है:

  • 30 दिनों की देरी पर सामान्य शुल्क का दोगुना,

  • 60 दिनों तक चारगुना,

  • 90 दिनों तक छह गुना,

  • 180 दिनों तक दसगुना,

  • 180 दिनों के बाद बारहगुना।

और अगर 365 दिनों तक ये फॉर्म नहीं जमा किया गया तो कंपनी का रजिस्ट्रेशन भी रद्द किया जा सकता है। एक लाख तक की ऑथॉरिज़ेड शेयर कैपिटल वाली कंपनियों के लिए सामान्य शुल्क 200 रुपये होता है।

 

8. Conclusion: Commencement of Business का महत्व

तो दोस्तों, 'Commencement of Business' न केवल एक कानूनी औपचारिकता है, बल्कि ये एक व्यावसायिक रणनीति का भी हिस्सा है। ये सुनिश्चित करता है कि कंपनी बाजार में एक मजबूत और विश्वसनीय खिलाड़ी के रूप में स्थापित हो सके। इसलिए, यह किसी भी नई कंपनी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है कि वह इस प्रक्रिया को सही ढंग से और समय पर पूरा करे।

याद रखिए, सपनों को हकीकत में बदलने के लिए ये प्रक्रिया बहुत जरूरी है, क्योंकि हर महान यात्रा की शुरुआत एक सपने से होती है। So, gear up and make your dream business a reality!

08 Jul

Bindu Soni
Bindu Soni

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